Wednesday, April 10, 2019

बीबीसी के नाम पर वायरल चुनाव सर्वेक्षण - क्या है सच?

बीते कुछ दिनों से ट्विटर से लेकर फेसबुक और वॉट्सऐप पर कई समूहों में एक फ़ेक न्यूज़ वायरल हो रही है.

इस फ़ेक न्यूज़ में दावा किया गया है कि बीबीसी, सीआईए और आईएसआई के सर्वे के मुताबिक़ लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी की जीत मिलने जा रही है.

लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब बीबीसी के नाम पर इस तरह की फ़ेक न्यूज़ वायरल हो रही हो.

इससे पहले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी ऐसी झूठी ख़बरें प्रसारित हो चुकी है.

लेकिन बीबीसी हर मौके पर स्पष्ट करता आया है कि वह चुनावों को लेकर किसी तरह का सर्वे नहीं करता है और इस बार भी कोई सर्वे नहीं किया गया है.

ख़ास बात ये है कि इस ट्वीट को प्रामाणिकता देने के लिए ट्वीट में बीबीसी न्यूज़ की वेबसाइट के होम पेज का लिंक भी लगाया गया है.

इसके अलावा ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने इस ट्वीट को शेयर किया है.

संयोग की बात है कि ऐसे कई लोगों के नामों के आगे चौकीदार लिखा हुआ पाया गया.

हर साल की तरह बीबीसी ने इस बार भी सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि बीबीसी इस तरह के सर्वे नहीं करता है.

बीबीसी हिंदी के संपादक मुकेश शर्मा ने भी फेसबुक पर लिखा है, "अक्सर चुनाव के समय देखा जाता है कि लोग ये दुष्प्रचार करते हैं कि बीबीसी ने 'चुनाव सर्वेक्षण' किया है और फलां पार्टी जीत रही है. एक बार फिर ऐसा दुष्प्रचार हो रहा है. इसमें बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव-2019 को लेकर बीबीसी ने एक सर्वे किया है जबकि बीबीसी ने ऐसा कोई सर्वे नहीं किया. बीबीसी ये स्पष्ट करना चाहता है कि न तो बीबीसी चुनावी सर्वेक्षण कराता है और न ही किसी एक पक्ष की ओर से किए गए 'इलेक्शन सर्वे' को प्रकाशित ही करता है. इससे पहले भी बीबीसी ने उसके नाम पर होने वाले चुनावी सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता का खंडन किया है."

"इसके बावजूद कुछ लोग बीबीसी की विश्वसनीयता का फ़ायदा उठाने की फ़िराक़ में रहते हैं. ऐसे मामले पहले भी देखे गए हैं जब राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान बीबीसी के नाम पर ऐसे चुनावी सर्वेक्षण चलाए गए मगर हक़ीक़त ये है कि बीबीसी ने ऐसा कोई सर्वेक्षण नहीं किया है."

इससे पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी झूठी ख़बरें वायरल हो चुकी हैं.

Tuesday, April 2, 2019

解放军战机飞越台湾海峡“中线”,中美台三方角力再掀波澜

两架中国解放军战斗机于3月31日飞越台湾海峡“中线”,引起台湾政府强烈抗议,批评中国挑衅,动摇台海和平。中国官媒《环球时报》则以社论回应此次越过“中线”乃严正警吿台独势力,并直接表示,台湾与美国近日的频繁军事互动,中国需给予美台警告。中美台三方的角力关系,以军事交锋,再次掀起波澜。

据台湾国防部日前记者会表示,3月31日台湾海峡上空,有两架中国“歼11战斗机”于当日上午11点飞越台湾海峡中线。台湾空军立刻派出在空中侦巡的IDF“经国号”战机前往拦截,四架F16战机也立即升空。双方对峙10分钟后,中国战斗机返回。

解放军战机飞越台海“中线”
台湾总统蔡英文隔日发文批评中国挑衅,并呼吁北京当局“不要挑衅、不要制造事端、不要破坏台海现状”。

中国官媒《环球时报》社论表示,“中线”只是条“心理线”,维持此“中线”之前提是“两岸关系的政治基础保持不变,台湾也不发生与外部势力超过以往水平的联系和互动。”

美国在台协会(AIT)发言人孟雨荷(Amanda Mansour)在接受台湾官媒《中央社》访问时表示:“北京应该停止强制胁迫手段,恢复与台湾民选政府对话。”

《环球时报》社论强调:“从美国通过《台湾旅行法》以来,美台互动不断以切香肠的方式加码。大陆方面不可能不作出反应,华盛顿太高估了其军事力量对大陆方面的威慑力。”

《环球时报》批评美国军舰今年三次通过台湾海峡之外,还有台湾在印太入群之后,与美国正在交易的军售,都是此次中方越过中线中国回击的严肃警告。

美国对台军售案成熟
蔡英文上周刚结束的台湾太平洋邦交国行程,在旅程尾声于美国领土夏威夷过境,并同时与华府重点智库“传统基金会”(The Heritage Foundation),发表视讯演说。蔡英文证实,台湾政府已向美国提出购买F-16B战斗机以及坦克车之要求,并表示此军购将“大大增强台湾的陆空作战能力,加强军事士气,并向全世界展示美国对台湾防御的承诺。”

此次军购若获美国国会通过,将是1992年美方出售150架F16A、B型战机之后,美国再次出售F16战机给台湾。据军事专家表示,在台湾东部花莲以及西部嘉义基地执勤的F16战机20年来,“链接”美台国防军事合作,在军事及像征意义上有独特地位。

台湾现有主要空中战斗机种,除了F16A、B型战机之外,还有向法国购买的幻象2000(Mirage 2000)美国技术支援台湾生产的“经国号”(F-CK-1)。但法国出售之幻象2000,给台湾仅有对空作战,没有对地作战功能。1997年交机之后,就因为中方压力下,不再卖给台湾,“经国号”也在技术升级中。

然而F16特別受到瞩目,并不只是其能执行多重任务战术,可装备空对空飞弹或炸弹之外,也可以执行地面支援任务。

蔡英文政府向美国提出的66架“F16V”型新型战机,亦是当今世界许多亚洲国家在军事上都十分倚重之新型机种,包含日本、韩国、新加坡以及巴基斯坦都向美购买F16。

亚洲军事研究学者,华府智库“2049研究所”(Project 2049 Institute)研究员纪思安(Ian Easton)接受BBC中文访问解释,F16对台湾是个好战略武器,主要是其可以对于中国近年来军机多次围绕台湾周围领空的挑衅以及窒息性的压迫性战略,有喝止作用。

军事专家,《全球防卫杂志》采访主任陈国铭也告诉BBC中文,F16对台湾的重要性,立基于其功能不在长驱直入敌方内陆,而是先以守为攻的展略,有效将中共战机驱除出台湾海峡。

Tuesday, March 26, 2019

知识产权保护:一家中国公司的觉醒

没有破门而入的迹象,没有人被绑架。没有玻璃被打碎。但这家位于上海郊区的工厂却因为知识产权盗窃遭受损失。

“几年前,我的一位IT经理复制了我公司1万页的资料,”刘方毅(Frank Liu)告诉我。他的公司英科国际(Intco)有25年历史。

他告诉我,被盗的内容包括“我们的技术信息、客户名单、采购和供应信息。所有的一切。”

英科国际是一家生产医疗设备、环保装饰建材和其它室内外装饰材料的公司。我参观了它在上海一个商业园区的办公室,以及坐落在这座城市南部一条林荫大道两侧的一家工厂。

该公司回收世界各地运往中国的聚苯乙烯废料。然后,利用热模塑和印模技术,将其转化为一系列环保产品,包括地板和相框,销往巴西或俄罗斯及英美国家。

刘方毅告诉我,“我们实际上有他盗窃的证据,” 他刚把它卖掉,(赚钱)成立了另一家公司。

他觉得自己已经失去了追索权。他报了警,但没看到任何进展。但他仍打算继续维权。

他的故事在中国越来越常见,本地企业和外国公司都遭遇了类似的问题。

美国和中国的高层官员将于本周举行下一轮贸易谈判,保护知识产权是美国政府的一项关键诉求。美方认为,在中国的美国和其他外国公司遭遇了数十年的盗窃和侵权。

中国已经采取一些措施来解决这个问题。中国在上世纪80年代才制订知识产权法律,自那以后,事情进展相对较快。

中国现在有专门的知识产权法庭,但服从于共产党的领导,要在12到18个月内结案。

知识产权法庭的创立并不仅仅是因为外国公司的外部压力。

像刘方毅这样的中国商界人士也呼吁,中国的法律体系应更好地保护创新者和企业家。他们正致力于让中国摆脱“山寨王国”的标签。

美国律所Loeb & Loeb的知识产权律师裘伯纯(Benjamin Qiu)告诉我,中国(公司)现在和外国公司一样喜欢打官司。

裘伯纯补充称,外国公司与中国国内的原告一样,都有可能打赢一场官司。过去几年,乐高和新百伦都在一些引人关注的知识产权案中获胜。

中国最近在北京召开的人大年度会议上通过《外商投资法》。该法规定,外国投资者向任何中国国内合作伙伴转让技术必须自愿。 此前中国要求外商必须向中国的合作方转让技术,并一直为这种极具争议的做法辩护,并坚称这是双方达成的商业协议的一部分。

新法律还禁止政府官员透露外国投资者知识产权的细节。

新时代?
然而,现在最难的部分来了:强制执行。

裘伯纯告诉我,下一步是“为这部法律制订详尽细则,我们希望看到地方法院和执法机构的实际案例。”

如果是这样,他认为“外国知识产权所有者在中国可能会有更多的保护。”

欧盟和美国商会都对这项新法律表示欢迎,但同时也批评了该法律的模糊性。美国人还担心,该法案在没有经过适当磋商的情况下就被仓促通过。

多年来,许多外国公司因中国知识产权保护乏力受到了冲击。大多数人发现,庞大市场的吸引力,以及一度处于谷底的劳动力成本是无法抗拒的。

但有些人认为风险太高。

一位水果业高管最近告诉我,他的公司想为他们在中国的农场采购新的传送带,但欧洲制造商拒绝了。欧洲公司担心他们的系统会遭到复制,然后自己就被踢除中国市场。

刘方毅不想那样做。他是中国人,想留在中国发展。但他已采取措施,试图防止另一起知识产权盗窃案的发生。

他是自己公司的首席执行官,但今年他告诉我,他将把自己的头衔改为研发主管。因为他不能把公司的商业秘密托付给任何人。

Wednesday, March 20, 2019

बॉर्डर पर इंडियन आर्मी को मिले 2 नए हथियार, PAK पर प्रहार तेज

भारत की एयरस्ट्राइक के बाद से ही पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है. पाकिस्तान लाइन ऑफ कंट्रोल पर लगातार सीज़फायर का उल्लंघन कर रहा है तो अब हमारे जवान भी उसे मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं. भारतीय जवानों को दो नए हथियार मिले हैं, जिसके कारण पाकिस्तान को चुन-चुनकर जवाब दिया जा रहा है.

जम्मू डिविज़न के सेक्टर में भारतीय सेना नई स्नाइपर रायफल्स से पाकिस्तानी सेना को जवाब दे रही है. बताया जा रहा है कि भारत की इस जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान में भारी नुकसान हुआ है.

चूंकि पाकिस्तान लगातार सीज़फायर तोड़े जा रहा है इसी वजह से भारत ने भी उसे उसकी ही भाषा में समझाने की ठान ली है. इस बार जिन दो नई स्नाइपर का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसमें Lapua Magnum और Beretta शामिल हैं. ये दोनों रायफल अलग-अलग कैलिबर की हैं, यही कारण है कि भारतीय जवानों को पाकिस्तानी किले को भेदने में मदद मिल रही है.

Lapua Magnum स्नाइपर को एक फिनलैंड की कंपनी बनाती है, इसका इस्तेमाल अफगानिस्तान और इराक की लड़ाई में अमेरिका के द्वारा किया जा चुका है. दुश्मन के किले को भेदने के लिए इस हथियार को सबसे कारगर माना जाता है.

वहीं अगर Beretta की बात करें तो ये एक मशहूर हथियार बनाने वाली कंपनी है. इस इटालियन कंपनी के हथियारों की दुनिया भर में चर्चा है और Beretta इसकी मुख्य रायफलों में से एक है. ये कंपनी कई तरह की मैग्ज़ीन भी बनाती है.

बता दें कि एयरस्ट्राइक होने के बाद से ही पाकिस्तान बॉर्डर पर सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है. अभी इसी सोमवार को पाकिस्तान सुंदरबनी सेक्टर में गोलीबारी की थी, जिसमें भारत का एक जवान शहीद हो गया था. हालांकि, हर बार पाकिस्तान को बॉर्डर पर मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है.

ब्रायन ऐक्टन आज तक टेक से कहा है, ‘अब फेसबुक प्रोडक्ट एक्सपीरिएंस को मर्ज (मिलाने) की कोशिश कर रही है. यह काफी मुश्किल काम है और इसका सफल होना भी आसान नहीं है’

ब्रायन पहले से ही वॉट्सऐप को पेड बनाना चाहते थे, ताकि यूजर्स के डेटा के साथ समझौता न करना पड़े. लेकिन फेसबुक की वजह से ऐसा नहीं हो पाया. फेसबुक और वॉट्सऐप के दोनों फाउंडर्स के बीच अनबन होती रही, क्योंकि फेसबुक ने अधिग्रहण के समय कहा था कि वॉट्सऐप को सेपरेट रखा जाएगा. लेकिन बाद में वॉट्सऐप के फाउंडर्स को लगा कि फेसबुक वॉट्सऐप के काम काज में इंटरफेयर कर रहा है.

गौरतलब है कि ब्रायन ऐक्टन और जेन कुम Yahoo में काम करते थे. उन्होंने 2007 में याहू छोड़ दिया और कुछ समय के लिए काम से ब्रेक लिया. कुछ समय बाद इन दोनों ने फेसबुक में जॉब के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया. 2009 में इन दोनों ने मिल कर वॉट्सऐप बनाया और 2014 में फेसबुक ने ही वॉट्सऐप को 19 बिलियन डॉलर (लगभग 13 खरब रुपये) में खरीद लिया.

Friday, March 8, 2019

देश की इकलौती महिला कमांडो ट्रेनर, जो आधे सेकंड में शूट करने की ट्रेनिंग देती हैं

मुंबई. डॉ. सीमा राव देश की पहली और इकलौती महिला कमांडो ट्रेनर हैं। इन्हें भारत की ‘सुपर वुमेन’ भी कहा जाता है। 49 साल की सीमा 20 साल से बिना सरकारी मदद के मुफ्त में आर्मी, एयरफोर्स और नेवी समेत पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडो को ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका नाम उन पांच चुनिंदा महिलाओं में आता है, जिन्हें 'जीत कुन डो' मार्शल आर्ट आता है। इसे ब्रूस ली ने ईजाद किया था।

डॉ. राव सशस्त्रबलों के जवानों को रिफ्लेक्स फायर यानी आधे सेकंड में किसी को शूट कर देने की ट्रेनिंग देने के लिए भी जानी जाती हैं। महिला दिवस पर भास्कर प्लस एप ने उनसे बातचीत की और उनकी कहानी के बारे में जाना।

भास्कर के सवालों पर डॉ. सीमा राव के जवाब
सुरक्षाबल पहले से एक स्तर तक प्रशिक्षित होते हैं। ऐसे में उनके जवानों को कमांडो ट्रेनिंग देने का विचार कैसे आया? उन्हें कैसे अप्रोच किया?

मैं बचपन में बहुत कमजोर थी। इसी कमजोरी को दूर करने के लिए मैंने मार्शल आर्ट्स सीखा और अनआर्म्ड कॉम्बैट में ब्लैक बेल्ट हासिल किया। उसके बाद मेरी शादी मेजर दीपक राव से हुई। एक दिन हम मॉर्निंग वॉक पर गए तो देखा कि जवान अनआर्म्ड कॉम्बैट की ट्रेनिंग ले रहे हैं। हमने जब पूछा तो पता चला कि ये आर्मी का ट्रेनिंग स्कूल है। फिर हमने वहां के कमांडेंट ऑफिसर से मिलकर एक वर्कशॉप की योजना बनाई। इस वर्कशॉप के बाद कमांडेंट ने हमें अच्छे रिव्यू दिए और इसी रिव्यू के आधार पर हम मुंबई पुलिस कमिश्नर आरडी त्यागी से मिले। जब त्यागी एनएसजी के महानिदेशक बने तो उन्होंने हमें अनआर्म्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग देने के लिए इनवाइट किया। उसके बाद हम आर्मी चीफ से मिले और बताया कि हम आर्मी को भी ऐसी ट्रेनिंग देना चाहते हैं। उन्होंने पैरासेंटर बेंगलुरु में कॉम्बैट ट्रेनिंग के लिए आर्मी का पहला कोर्स शुरू करवाया। धीरे-धीरे आर्मी की अलग-अलग यूनिट्स हमें ट्रेनिंग देने के लिए बुलाने लगीं। इसके बाद मैंने शूटिंग सीखी। मैंने आर्मी की अलग-अलग यूनिट्स में भी इसके डैमाे दिए। इस तरह मैं नेवी, आर्मी, एयरफोर्स, पुलिस फोर्स और पैरामिलिट्री फोर्स को ट्रेनिंग देने लगी।

आप किस तरह की ट्रेनिंग देती हैं?
मेरा ट्रेनिंग सब्जेक्ट है क्लोज क्वार्टर बैटल (सीक्यूबी)। सीक्यूबी यानी दुश्मन के साथ 30 मीटर के अंदर लड़ाई करना। इसे हम दो तरह की स्थिति में देखते हैं।

पहला- कमांडो सिचुएशन, जहां हम दुश्मन की धरती पर जाकर कमांडो ऑपरेशन करते हैं। दुश्मन के इलाके में जाकर और उससे लड़कर जब कमांडो वापस आता है तो उसे क्लोज क्वार्टर बैटल कहते हैं। सीक्यूबी में विस्फोटक इस्तेमाल करना और रूम के अंदर फायरिंग करना भी सिखाया जाता है।

दूसरा- काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन। इसमें हमारे कमांडो आतंकी से 30 मीटर की दूरी से लड़ाई करते हैं। सीक्यूबी का काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन और कमांडो मिशन में फायदा होता है। इस ट्रेनिंग में अलग-अलग सब्जेक्ट होते हैं।

अनआर्म्ड कॉम्बैट : इसमें बिना हथियार के दुश्मन से लड़ाई करना सिखाया जाता है।

रिफ्लेक्स शूटिंग : जब दुश्मन 30 मीटर के अंदर है तो हमें उसकी गोली लगने से पहले उसे हमारी गोली लगनी चाहिए।

ग्रुप शूटिंग : इसमें हम बताते हैं कि एक टीम या ग्रुप कैसे दुश्मन पर गोली चला सकते हैं। इसमें सिखाया जाता है कि कैसे एक टीम मिलकर दुश्मन को गोली मारे।

हमने आर्मी, आर्मी की स्पेशल फोर्सेस, कमांडो विंग, एनएसजी, मरीन कमांडो, एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो, पैरामिलिट्री फोर्स जैसे- बीएसएफ, आईटीबीपी को ट्रेन किया है। 1997 से लेकर अभी तक हमने अलग-अलग प्रकार की फोर्सेस को ट्रेन किया है। साथ ही हमने 12 राज्यों की पुलिस को भी प्रशिक्षण दिया है।

आपने ट्रेनिंग का एक नया तरीका ‘राव सिस्टम ऑफ रिफ्लेक्स फायर’ खोजा है, यह क्या है?

यह एक अलग तरीके से शूट करने की तकनीक है। जब दुश्मन 30 मीटर के अंदर होता है, तब आप राइफल लेकर बराबर निशाना लगाकर शूट नहीं कर सकते, क्योंकि इसमें 1-2 सेकंड का समय लगता है। जब दुश्मन पास होता है तो हमारे पास 2 सेकंड नहीं होते। इसलिए हमें आधे सेकंड के अंदर शूटिंग करनी होती है। यह एक ऐसी तकनीक है जब दुश्मन 30 मीटर के अंदर हो तो राइफल के फोरसाइट से निशाना लगाकर दुश्मन को शूट किया जाता है और इससे सिर्फ आधे सेकंड या उससे भी कम वक्त में टारगेट को हिट किया जा सकता है।

आपने ब्रूस ली का खास मार्शल आर्ट जीत कुन डो सीखा है। यह क्या होता है? और बाकी मार्शल आर्ट्स से यह कितना अलग है?

1970 में ब्रूस ली की जब 'इंटर द ड्रैगन' रिलीज हुई तो पूरी दुनिया ब्रूस ली के मार्शल आर्ट्स 'जीत कुन डो' से इम्प्रेस हो गई। लेकिन उस जमाने में सिर्फ कराटे ही था तो लोगों को लगा कि यही ब्रूस ली का मार्शल आर्ट है। लेकिन कराटे और जीत कुन डो पूरी तरह से अलग हैं। जीत कुन डो में किक, पंच, कोहनी और घुटनों का इस्तेमाल होता है। इसमें कुश्ती भी होती है और दुश्मन को जमीन पर लिटाकर हिट करना होता है। कुल मिलाकर, ब्रूस ली के जीत कुन डो में किकिंग, पंचिंग, कुश्ती और मैट फाइटिंग भी है। इसलिए ये बाकी मार्शल आर्ट से अलग है। जैसे- ताइक्वांडो में सिर्फ किकिंग है, बॉक्सिंग में पंचिंग है, ग्रेको रैमन रेसलिंग में कुश्ती है, लेकिन ब्रूस ली के जीत कुन डो में सभी का मिश्रण है। आजकल मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स होता है, वह भी ब्रूस ली के मार्शल आर्ट से ही प्रेरित है। इसलिए ब्रूस ली को फादर ऑफ मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स कहा जाता है। ब्रूस ली अपने निधन से पहले पांच लोगों को यह आर्ट सिखाकर गए थे। मैंने ब्रूस ली के स्टूडेंट रहे ग्रैंड मास्टर रिचर्ड बूफ्तिलो से जीत कुन डो सीखा है। दुनियाभर की सिर्फ पांच महिलाओं के पास ही जीत कुन डो सीखने का इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेशन है। इनमें से एक मैं हूं।

अब तक के सफर में जवानों को ट्रेनिंग देते हुए आपकी लर्निंग क्या रही?
पहली और सबसे बड़ी लर्निंग है अनुशासन। अनुशासन के बिना कोई भी जंग जीती नहीं जा सकती। दूसरी लर्निंग- रणनीति। सही रणनीति का इस्तेमाल कर एक हारी हुई जंग को जीत में बदला जा सकता है। तीसरा- साहस। जब हार का सामना करना पड़े तो साहस ही एक ऐसी चीज है, जिसके सहारे आगे बढ़ा जा सकता है।

कौन-सी ऐसी बातें हैं जो किसी व्यक्ति की हार-जीत तय करती हैं?
पहली : कोई भी महिला, पुरुष के बराबर ही होती है। वह हर वह काम कर सकती है जो एक पुरुष कर सकता है।

दूसरी : जब किसी चीज में हार का सामना करना पड़े तो निश्चय बनाए रखिए और प्रयास करते रहिए। 
तीसरी : हिम्मतवाले की ही जीत होती है।

चौथी : अपने लिए ऊंचे लक्ष्य तय कीजिए और अपनी योग्यता की दिशा में आगे बढ़िए।
पांचवीं : एक अलग सोच बनाइए और परंपरा से हटकर सोचना सीखिए।

पुलवामा हमले के बाद देश में हर कोई अपनी तरह से सेना की मदद करना चाहता है। आपने भी सशस्त्र बलों की अपने तरीके से मदद की है। ऐसे में आम नागरिक किस तरह मदद कर सकते हैं?

आम आदमी के लिए जरूरी है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें, वे सशस्त्र बलों पर भरोसा करें। आप अपने बच्चों को सुरक्षाबल ज्वाइन करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसका सबसे अच्छा तरीका एनसीसी है। इसके जरिए काफी सारे सुरक्षाबलों में शामिल होने के अवसर रहते हैं। हम अपने बच्चों या स्टूडेंट्स को एनसीसी में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

एक महिला होकर पुरुषों को ट्रेनिंग देने का ख्याल कैसे आया?
हमें फोर्सेस को ट्रेन करना था और 1996-97 में कमांडो यूनिट्स और इन्फेन्ट्री यूनिट्स में सिर्फ पुरुष ही थे। हालांकि, आज कई फोर्सेस में महिलाएं हैं।

Wednesday, February 27, 2019

आओमोरी शहर में 21 फीट तक बर्फबारी, बर्फ हटाने का खर्च 248 करोड़ रुपए

टोक्यो. जापान का आओमोरी शहर दुनिया के सबसे ज्यादा बर्फीले स्थानों में से एक है। हाल ही में यहां 21 फीट बर्फबारी हुई। इतनी बर्फ दो मंजिला इमारत को ढांकने के लिए काफी है। पिछले साल बर्फ हटाने के लिए सरकार को 35 मिलियन डॉलर (करीब 248 करोड़ रुपए) खर्च करने पड़े। इस शहर में 30 हजार लोग रहते हैं।

सी-इफेक्ट स्नो
हर साल आओमोरी में बर्फीले तूफान आते हैं। नवंबर से शहर में हड्डी कंपा देने वाली साइबेरियाई हवाएं चलने लगती हैं। जैसे ही ठंडी हवा जापान के पहाड़ी तट से गर्म पानी को पार करती है, यह नमी इकट्ठा करती है और बर्फ में बदल जाती है। इसे सामान्य भाषा में सी इफेक्ट स्नो कहा जाता है। नवंबर में ही शहर में 8 फीट तक बर्फबारी हो जाती है।

सी इफेक्ट स्नो के चलते ठंड में आओरी और उसके आसपास के इलाको में बर्फ की मोटी परत जम जाती है। बर्फ की यह मोटी चादर अप्रैल तक होती है। घरों की छतें, सड़कें, शहर के निचले इलाकों में बर्फ ही बर्फ दिखाई देती है।

आओमोरी के बाहरी इलाके में रहने वाली जूलिया मिनातोया कहती हैं कि यहां रहने वाले हर व्यक्ति को हर दिन संघर्ष करना पड़ता है। हालांकि आओरी ठंड के दिनों में यहां परिवहन बंद नहीं होता। इसके चलते बर्फ देखने के लिए यहां भारी तादाद में पर्यटक आते रहते हैं।

एक सी फूड विक्रेता योने नात्सुमे कहते हैं कि आओरी में मछली खासकर कॉडफिश मिलने का सबसे अच्छा सीजन ठंड ही है। लोग यहां आकर मौज करते हैं। अमेरिका से यहां घूमने आए टिम रॉबर्ट्स कहते हैं कि यह जगह दुनिया से अलग इसलिए है क्योंकि यहां पहाड़ों में ज्यादा मोड़ नहीं है।

आओमोरी तक पहुंचना भी मुश्किल नहीं है। टोक्यो से हाईस्पीड ट्रेन से यहां महज तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है। यहां का एयरपोर्ट पहाड़ पर बसे एक कस्बे में है। ठंड में ट्रेन से आना ही बेहतर है, क्योंकि बर्फबारी के चलते अक्सर फ्लाइट कैंसिल हो जाती हैं। यहां से बर्फ हटाने के लिए 120 सदस्यीय टीम लगातार काम में जुटी रहती है।

जब आपको फिल्म ऑफर हुई तो आपने क्या सोच कर उसके लिए हामी भरी?
स्नेहा : मेरे पिता किसान हैं। गांव में उनकी वजह से मैं जानी जाती हूं। मेरा सपना है कि लोग मेरी वजह से मेरे पिता को जानें, इसलिए मैं पुलिस में जाना चाहती हूं। बस उसी सपने की वजह से मैंने फिल्म की। कभी नहीं सोचा था कि यह छोटी-सी फिल्म इतना बड़ा अवार्ड जीत लेगी।

अब क्या सपना है, फिल्म लाइन में ही करियर बनाना है या कुछ और करना है?
स्नेहा : मेरा सपना दिल्ली पुलिस में भर्ती होना है। यह सपना मैंने बचपन से देखा है। 2018 में मैंने फिजिकल निकाल लिया था। लेकिन लिखित परीक्षा में कुछ नंबरों से पीछे रह गयी। मैं अभी भी उसकी तैयारी कर रही हूं। हालांकि, अभी कोई वैकेंसी नहीं आई है। यूपी पुलिस की परीक्षा दी है। अब देखें क्या रिजल्ट आता है?

अभी आप अमेरिका में हैं, कैसा अनुभव रहा आपका?
स्नेहा : मैं रेड कारपेट पर चली। मैंने जिंदगी में इतने कैमरे नहीं देखे, जितने यहां देखे हैं। जिस समय ऑस्कर अनाउंस हुआ, उस समय मैं एआर रहमान के साथ बैठी थी। मैं तब चीख पड़ी थी। रहमान साहब ने मेरा फोटो अपने मोबाइल में खींचा और मेरे साथ सेल्फी भी ली। जो लड़की हापुड़ से दिल्ली तक नहीं गई, उसके लिए यह गौरवान्वित करने वाला पल था।

Thursday, February 21, 2019

पाक‍िस्तानी सांसदों ने सऊदी प्रिंस को ग‍िफ्ट में दी सोने की बंदूक

पाक‍िस्तान भले ही कंगाली की कगार पर हो और पाक‍िस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान कारों के कारवां को बेच धन जमा करने को मजबूर हों लेक‍िन मेहमाननवाजी में वे पीछे नहीं रहते. पाक‍िस्तानी सांसद ने सऊदी अरब के शहजादे को गोल्ड-प्लेटेड गन ग‍िफ्ट में दी. प्रधानमंत्री इमरान खान के ही सामने उनके घर पर ये गन ग‍िफ्ट में दी गई.

दरअसल, सांसदों के एक डेल‍िगेशन ने सीनेट चेयरमैन साद‍िक संजरानी के नेतृत्व में सऊदी राजकुमार को प्रधानमंत्री आवास पर बुलाया था. उनका स्वागत बहुत जोरदार तरीके से हो और पाक‍िस्तान के साथ उनके र‍िश्ते अच्छे रहें, इसके ल‍िए उन्होंने कुछ अलग करने की सोची.

वहां पाकिस्तानी सांसद ने सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद ब‍िन सलमान को सोने से मढ़ी हुई गोल्ड प्लेटेड MP-5 ग‍िफ्ट की ज‍िसकी दुन‍िया भर में चर्चा हो रही है . इसके साथ ही इन्होंने राजकुमार का एक पोर्टेट भी ग‍िफ्ट क‍िया. बंदूक के साथ सोने की ही ढेर सारी गोलि‍यां भी दी गईं.

बता दें क‍ि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान रविवार को पाकिस्‍तान की राजधानी इस्‍लामाबाद पहुंचे थे. सऊदी सुल्तान के शहजादे को यह पहला पाकिस्‍तान दौरा था और आते ही उन्‍होंने इस्‍लामाबाद के साथ अपनी दोस्‍ती निभा दी थी. सऊदी के शहजादे ने पाक में 20 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान क‍िया था. सऊदी के शहजादे मोहम्मद ब‍िन सुल्तान बुधवार से भारत दौरे पर हैं.

प्रधानमंत्री इमरान खान को भी म‍िली थी सोने की गन
गौरतलब है क‍ि 15 जनवरी को जब पाक‍िस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सऊदी अरब के दौरे पर गए थे. वहां ताबुक प्रॉव‍िंस के गर्वनर प्र‍िंस फहाद ब‍िन सुल्तान ब‍िन अब्दुल अजीज ने उन्हें गोल्ड-प्लेटेड क्लाशन‍िकोव गन और सोने की गोल‍ियां ग‍िफ्ट में दी थीं.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद 7 दिन तक चुप रहने के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जब 14 फरवरी को दोपहर में पुलवामा में आतंकी हमले में हमारे 40 जवानों की शहादत हुई तो पूरा देश शोक मना रहा था. उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम तक कॉर्बेट पार्क में एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे. क्या दुनिया में ऐसा कोई पीएम है?

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पुलवामा में 3 बजकर 10 मिनट पर हमला हुआ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम 6.10 बजे तक शूटिंग कर रहे थे. जबकि देश हमारे शहीदों के टुकड़े चुन रहा था और पीएम मोदी अपने नाम के नारे लगवा रहे थे. आतंकी हमले में जवानों की शहादत के बाद देश के घरों में चूल्हे बंद थे और पीएम उत्तराखंड के रामनगर के गेस्ट हाउस में चाय नाश्ता कर रहे थे.

कांग्रेस ने कहा कि शायद ही दुनिया में किसी देश के प्रधानमंत्री ने ऐसा कभी किया हो. इस देश का प्रधानमंत्री पुलवामा हमले के बाद चार घंटे तक वन विहार करता रहे. देश शहीदों के टुकड़े चुन रहा था, तब पीएम नरेंद्र मोदी जलसे कर रहे थे. हमले के बाद 3 घंटे तक शूटिंग कर रहे थे. ऐसे प्रधानमंत्री को क्‍या कहा जाए, मेरे पास शब्द नहीं हैं.

सुरजेवाला ने कहा कि हमले के बाद भी प्रधानमंत्री नौका विहार करते रहे. उनकी सभाएं नहीं रुकीं. मंत्रियों ने शहीदों के ताबूत के साथ सेल्‍फी ली. देश अभी शोक में डूबा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सैर-सपाटे के लिए विदेश दौरे पर चले गए हैं. पालम एयरपोर्ट पर भी शहीदों के ताबूत पीएम नरेंद्र मोदी का इंतजार करते रहे, लेकिन वे वहां लेट पहुंचे.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि हम पुलवामा के कायराना हमले पर निर्णायक कार्रवाई की मांग करते हैं. इंदिरा गांधी ने न केवल बांग्लादेश को आजादी दिलवाई बल्कि नियाजी को 91000 पाक सैनिकों के साथ समर्पण करना पड़ा था. पाकिस्तान को इंदिरा गांधी ने धूल चटाने का काम किया था.